मोहब्बत

हर वक्त कैसे अपने दिल को समझा रहे हैं


बेवजह ही  वो मेरे दिल को दुखा रहे हैं


लगता है उन्हें भी सिर्फ चेहरों से मोहब्बत हैं


तभी मेरे दिल की गलियों से दूर जा रहे हैं।

By Sourabh ji

नैनन

आ पिया इन नैनन में जो पलक ढांप तोहे लूँ

न मैं देखूँ गैर को न तोहे देखन दूँ

काजर डारूँ किरकिरा जो सुरमा दिया न जाये

जिन नैनन में पी बसे तो दूजा कौन समाये

मैंने मासूम बहारों में तुम्हें देखा है,
मैंने पूर नु  सितारों में तुम्हें देखा है
मेरे महबूब तेरी पर्दानसीनी की कसम,
मैंने अश्कों की कतारों में तुम्हें देखा है

ज़मीन ,आसमाँ

मैं ढूँढ़ता हूँ जिसे वो जहाँ नहीं मिलता
नई ज़मीन नया आसमाँ नहीं मिलता

नई ज़मीन नया आसमाँ भी मिल जाए
नए बशर का कहीं कुछ निशाँ नहीं मिलता

झिजक

अब जिस तरफ़ से चाहे गुज़र जाए कारवाँ
वीरानियाँ तो सब मिरे दिल में उतर गईं
……..

बस इक झिजक है यही हाल-ए-दिल सुनाने में
कि तेरा ज़िक्र भी आएगा इस फ़साने में
…….

Chai

पर्वत हैं बर्फ की चादर से ढकी, 

बादल हैं , बेमिशाल है आज मौसम भी ;

इक समा है इस शाम में,

बारिश है, और कुछ धुंधली यादे भी,  

फिर तेरी कमी सी खली है आज यूं 

जैसे मेरी चाय रह गयी है फीकी सी :

Barish

Ki Wo Barish बंद Hone Par पेड़ो Se पंछियो Ka Nikalna
Ek Ache Lamho Se kaid Shaam Mai सूरज ka ढल Jaana
Itna बेहद toh हसीन है !

Par Sirf Ek Tere Kami Hone BHAR Se Aankhon Mai नमी kyun hai????

Nakab

” मैंने गर्म तवे पर सिकती रोटियों के साथ जलते ख़्वाब देखे हैं
अक्शर उदास चेहरों पर नकली हंसी के नकाब देखे हैं ”